Wednesday, June 29

'इस' कारण से राष्ट्रवादी ने नकार दिया था 'मुख्यमंत्री' पद !

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विधानसभा के नतीजों के बाद राज्य में सत्ता संघर्ष को लेकर कई घटनाक्रम हुए. आख़िरकार महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी और कांग्रेस पार्टी ने मिलकर महाविकास गठबंधन सरकार का गठन किया. इस सरकार के गठन से पहले एनसीपी नेता अजीत पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. बताया गया कि मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने से खफ़ा अजीत पवार ने बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया था. हाल ही में शरद पवार ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया है कि एनसीपी ने मुख्यमंत्री पद क्यों नकार दिया था.

युति सरकार आने से पहले साल 2014 में कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार सत्ता में थी, जिसने 15 साल तक राज्य का कार्यभार संभाला. इस दौरान, विधान सभा चुनाव में एनसीपी को कांग्रेस से अधिक सीटें मिलीं थी. उस समय, सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी का मुख्यमंत्री बनने का फॉर्मूला तय हुआ था. फिर भी, राकांपा ने मुख्यमंत्री पद नहीं लिया. इसकी जगह एनसीपी ने कैबिनेट में अधिक विभाग ले लिए. शरद पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री कांग्रेस को दिया गया था, क्योंकि पार्टी का उद्देश्य राज्य का विस्तार करना था.

महाराष्ट्र में महाविकास गठबंधन की सरकार में एनसीपी को ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद मिलना संभव था. शिवसेना भी इसमें राजी थी. हालांकि, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री पद लेने से इंकार कर दिया और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बना दिया गया. इसलिए, अब सवाल यह उठा रहा है कि क्या शरद पवार अभी भी पार्टी के विस्तार पर विचार कर रहे हैं? महाविकास गठबंधन में एनसीपी को उप मुख्यमंत्री सहित सर्वाधिक 16 मंत्री पद मिलेंगे, जबकि शिवसेना को 15 और कांग्रेस को 12 मंत्री पद मिलेंगे.