Wednesday, June 29

बलात्कार के वक्त अपराधी के दिमाग में क्या चलता है?, जानिए

[ad_1]

देश की महिलाओं में निर्भया, कठुआ और मुजफ्फर जैसे मामलों का गुस्सा अभी कम भी नहीं हुआ था, कि अब हैदराबाद में भी ऐसी ही घटना हो गई। देश में ऐसे अपराध बेहद तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन अभी तक केवल प्रदर्शन कर ही लोग अपना विरोध जता पा रहे हैं, अपराधियों को तुरंत फांसी पर चढ़ाने की कोई तैयारी नहीं दिख रही है।



रेप के अपराधियों की मंशा-


ऐसे में आज हम एक ऐसी रिपोर्ट के बारे में बात करेंगे, जिसमें रेप के अपराधियों की मंशा के बारे में बताया गया है। ब्रिटेन के शेफील्ड हैलम यूनिवर्सिटी में क्रिमिनॉलिजी की लेक्चरर मधुमिता पांडेय के मुताबिक उस वक्त वह महज 22 साल की थीं, जब पहली बार दिल्ली की तिहाड़ जेल गईं। उन्होंने कुछ बलात्कारियों से मुलाकात कर उनका साक्षात्कार लिया।

100 अपराधियों का साक्षात्कार-


उन्होंने अगले तीन साल तक ऐसे ही 100 अपराधियों का साक्षात्कार लिया। उनका ये प्रोजेक्ट साल 2013 में शुरू हुआ था। साल 2015 में महिलाओं के साथ रेप के कुल 34,6451 मामले हुए थे जबकि साल 2016 में ये संख्या बढ़कर 38,947 हो गई।

‘कोई इंसान नहीं कर सकता ये काम’-


पांडे कहती हैं कि हर कोई एक जैसी बात सोचता है। ‘ये आदमी ऐसा क्यों करते हैं? हम इन्हें राक्षस समझते हैं और हम यही सोचते हैं कि कोई इंसान ऐसा काम नहीं कर सकता है।’ निर्भया कांड के बाद उन्होंने 2013 में ये रिसर्च शुरू की। वह कहती हैं कि इस कांड के बाद लोग सड़कों पर उतर आए। दिल्ली में पली बढ़ी पांडे ने निर्भया कांड के बाद अपने शहर की एक अलग ही तस्वीर देखी। जिसके बाद वह सोच में पड़ गईं, ‘कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां होती हैं कि ऐसे आदमी पैदा होते हैं?’