Wednesday, June 29

राहुल गांधी कांग्रेस में फिट नहीं, सोनिया के बाद प्रियंका संभाल सकती हैं कमान

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महाराष्ट्र में नई सरकार गठन में किंगमेकर की भूमिका निभाने वाली  कांग्रेस इन दिनों अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर है। मोदी सरकार को घेरने के लिए पार्टी 14 दिसंबर को दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करने जा रही है। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार और उसके बाद लंबे समय तक नेतृत्व संकट से जूझने वाली कांग्रेस इन दिनों मोदी सरकार पर बेहद अक्रामक नजर आ रही है। ऐसे में कांग्रेस को लेकर अचानक से सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरु हो गया है। 2017 के बाद कांग्रेस ने देखते ही देखते पांच बड़े राज्यों में सत्ता में काबिज हो गई है। इसके बाद चर्चा इस बात की शुरु हो गई है कि क्या कांग्रेस चुपचाप वापसी कर रही है। वेबदुनिया ने कांग्रेस की राजनीति को बहुत ही करीब से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई से कांग्रेस में नेतृत्व और उसकी आने वाले रणनीति को लेकर खास बातचीत की।

सोनिया का सत्ता का गेमप्लान –

 महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार में कांग्रेस के शामिल होने के फैसले को राशिद किदवई सोनिया गांधी की एक बड़ी जीत के तौर पर देखते है। वह कहते हैं कि कांग्रेस की विचारधारा किसी सीमा में नहीं बंधी हुई है। अगर कांग्रेस के इतिहास को देखे तो देखने में मिलता है कि पार्टी ने अपनी विचारधारा को लेकर समय समय पर प्रयोग किए है। पचमढ़ी और शिमला में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में गठबंधन की राजनीति को लेकर काफी अहम फैसले लिए गए है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुए पचमढ़ी सम्मेलन में तय किया गया था कि अगर पार्टी को सत्ता के लिए गठबंधन करना पड़े तो समान विचारधारा वाले लोगों से वह गठबंधन कर आगे बढेगी और सोनिया के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने महाराष्ट्र में इसी एजेंडे पर आगे बढ़ी है। वह कहते हैं कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस में एक व्यावहारिक रुप से उपयोग हो रहा है। राजनीति में सत्ता का बहुत महत्व होता है और अब कांग्रेस सत्ता में आने का कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहती है।