Wednesday, June 29

लोकसभा में उठी पीड़िता की पहचान जाहिर करने वालों पर कार्रवाई की मांग

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हैदराबाद में पिछले सप्ताह एक पशु चिकित्सक के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके बाद उसकी हत्या के मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों पर कार्रवाई की माँग गुरुवार को लोकसभा में की गयी। तेलुगू देशम पार्टी के जयदेव गल्ला ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह मसला उठाते हुये कहा कि इस मामले में कुछ मीडिया प्रतिष्ठानों ने निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा कि पीड़िता पशु चिकित्सक और उसके परिवार की निजता नहीं बनायी रखी गयी। पीड़िता की तस्वीर और उसका नाम मीडिया ने उजागर किया है। गल्ला ने कहा कि पीड़िता की निजता तथा गौरव सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसे हर हाल में बनाये रखना चाहिये। उन्होंने सरकार से पीड़िता की पहचान जाहिर करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

निर्भया मामले (Nirbhaya Case) में अगर चारों दोषी अभी भी फांसी के फंदे से दूर हैं, तो इसके पीछे कहीं न कहीं ‘स्टेट’ जिम्मेदार है. देश की कानून प्रक्रिया में व्याप्त पेंच-ओ-खम का सीधा-सीधा फायदा निर्भया के गुनाहगार उठा रहे हैं तो केंद्र या दिल्ली सरकार (Arvind Kejriwal) की ‘गंभीरता’ भी इस मामले में उठते सवालों से परे नहीं है. अगर ये ‘लापरवाही’ नहीं होती तो फास्ट ट्रैक कोर्ट (fast Track Court) ने जो फैसला महज नौ महीने में सुना दिया था, उस पर अमल करने में सात साल का वक्त नहीं लगता. परोक्ष तौर पर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को कठघरे में खड़ी करती यह टिप्पणी निर्भया केस की वकील सीमा समृद्धि की हैं, जिन्होंने न्यूज स्टेट से बातचीत करते हुए कई ऐसे प्वाइंट उठाए जो हमारी व्यवस्था की ‘लाचारगी’ ही सामने लाते हैं.




सुप्रीम कोर्ट में दो साल तक केस मेंशन तक नहीं हुआ-

एडवोकेट सीमा समृद्धि ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले की सेशन कोर्ट में चुनौती दी गई. वहां भी फांसी की सजा बरकरार रखी गई. फिर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से 3 मार्च 2014 को सजा यथावत रखने का निर्णय आ गया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 2016 तक उसे सुनवाई के लिए ही नहीं लगाया गया. सीमा बताती हैं कि बतौर प्राइवेट प्रैक्टिशनर सर्वोच्च अदालत की ध्यान इस केस की ओर आकृष्ट कराने पर सुनवाई शुरू हुई और फिर से निर्भया के गुनाहगारों की फांसी की सजा 9 मार्च 2018 को बरकरार रखी गई. इसके बाद भी बचाव पक्ष के वकील और सरकार के रवैये से फांसी की सजा मुकर्रर नहीं हो पा रही है.